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Chandrapur

Chandrapur: चिमूर में पट्टेदार बाघ के हमले में चरवाहे की दर्दनाक मौत, बकरी अकेले लौटीं तो खुला राज


चंद्रपुर: चंद्रपुर जिले के चिमूर क्षेत्र से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां तलौधी वन परिक्षेत्र के मोटेगांव जंगल परिसर में बकरियां चराने गए एक चरवाहे पर पट्टेदार बाघ ने जानलेवा हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। यह दर्दनाक हादसा आज (31 मई) सुबह करीब 10 बजे मोटेगांव के कंपार्टमेंट नंबर 38 में हुआ। बाघ के इस खौफनाक हमले और चरवाहे की मौत के बाद से पूरे इलाके के ग्रामीणों में भारी दहशत और गुस्से का माहौल है। मृतक की पहचान मोटेगांव निवासी दिलीप जानबा ननावरे (उम्र 45 वर्ष) के रूप में हुई है।

500 मीटर दूर घसीट कर ले गया बाघ, बकरियां अकेले लौटीं घर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिलीप ननावरे हमेशा की तरह सुबह मोटेगांव-पेंढारी मार्ग पर स्थित बद्री पहाड़ी के नीचे बकरियां चराने गए थे। इसी दौरान जंगल में घात लगाकर बैठे एक बड़े पट्टेदार बाघ ने उन पर अचानक हमला कर दिया और उन्हें मौके पर ही मार डाला। हमला इतना हिंसक था कि बाघ चरवाहे के शव को करीब 500 मीटर दूर घसीटते हुए जंगल के भीतर ले गया। इस हमले के दौरान वहां मौजूद 15 से 20 बकरियां डरकर इधर-उधर भागने लगीं और दोपहर को अकेले ही सुरक्षित घर लौट आईं। जब बकरियां तो घर आ गईं लेकिन पिता वापस नहीं लौटे, तो उनके बेटे ने फोन लगाया। फोन का कोई जवाब न मिलने पर बेटा कुछ बच्चों को साथ लेकर जंगल की तरफ ढूंढने निकला, जहां उन्हें पिता की कुल्हाड़ी और फटे हुए कपड़े मिले। बच्चों ने तुरंत गांव भागकर इसकी जानकारी बड़ों को दी, जिसके बाद ग्रामीणों ने जंगल खंगाला और घटनास्थल से 500 मीटर दूर दिलीप का शव बरामद हुआ।

सुबह ही महिलाओं और राहगीरों को दिखा था बाघ
चौंकाने वाली बात यह है कि घटना से ठीक पहले सुबह करीब 8 बजे इसी इलाके में स्थित वन विभाग की नर्सरी (रोपवाटिका) में पानी डालने वाली महिला मजदूरों ने इस बाघ को रास्ता पार करते हुए देखा था। इसके अलावा सड़क से गुजरने वाले कुछ राहगीरों ने भी इसे जंगल की तरफ जाते देखा था। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम से एसीएफ महेश गायकवाड़, वन परिक्षेत्र अधिकारी अनूप कन्नमवार, वनरक्षक केशव पाटिल, संभाजी वडझें और बालकृष्ण नागरे सहित चिमूर पुलिस का दस्ता तुरंत मौके पर पहुंचा। पुलिस और वन विभाग ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए उपजिला अस्पताल भेज दिया है।

परिवार की हालत बेहद नाजुक, वन विभाग ने दी मदद
मृतक दिलीप ननावरे अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद हलाकान है और उनके पास बहुत ही कम सूखी (कोरडवाहू) खेती है। इस दुखद घटना को देखते हुए वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए मृतक के परिवार को 50 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक मदद मुहैया कराई है, जबकि बाकी बची मुआवजे की रकम सरकारी नियमों के अनुसार जल्द ही देने का आश्वासन दिया है। इस घटना के बाद से मोटेगांव और आसपास के परिसर में भारी डर का माहौल है, जिसे देखते हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग से इस नरभक्षी बाघ का तुरंत बंदोबस्त करने की पुरजोर मांग की है।