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Chandrapur

ताडोबा की ‘चंदा’ और ‘चांदनी’ के स्थानांतरण का स्थानीयों ने किया विरोध; क्या ‘सह्याद्री’ का बाघ पुनर्वास अभियान थम जाएगा?


चंद्रपुर:  चंद्रपुर जिले में बाघों की संख्या तेज़ी से बढ़ने के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, सह्याद्री टाइगर रिज़र्व (Sahyadri Tiger Reserve) में प्रजननक्षम मादा बाघिनों की कमी के चलते वहां बाघों की संख्या बढ़ने में कठिनाई आ रही है।

इसी पृष्ठभूमि पर, चंद्रपुर जिले की हाल ही में प्रजननक्षम हुई आठ बाघिनों को सह्याद्री में स्थानांतरित करने का निर्णय वन विभाग ने लिया है। लेकिन इस निर्णय का स्थानीय गाइडों, जिप्सी चालकों और ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया है। इससे अब सह्याद्री में बाघ पुनर्वास अभियान पर सवालिया निशान लग गया है।

चंदा-चांदनी’ हैं झरनी और छोटा मटका की संताने

‘चंदा’ और ‘चांदनी’ बाघिनें ताडोबा के प्रसिद्ध टाइगर कपल झरनी और छोटा मटका की बेटियां हैं। अपने पिता की तरह ही निडर और आत्मविश्वासी स्वभाव के कारण ये दोनों बाघिनें पर्यटकों में काफी लोकप्रिय हैं।वर्तमान में वे अलिझंजा, नवेगांव और निमढेला क्षेत्रों में रहती हैं। हाल ही में प्रजननक्षम हुई इन बाघिनों को सह्याद्री टाइगर रिज़र्व में भेजने का निर्णय लिया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसका तीव्र विरोध किया है।

विशेष बात यह है कि, दोनों बाघिनें गर्भवती हैं, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। इस स्थिति में उनका स्थानांतरण न केवल उनके लिए, बल्कि उनके शावकों के जीवन के लिए भी खतरा बन सकता है।

स्थानीयों के विरोध के प्रमुख कारण

जन्मभूमि से जुड़ाव: चंदा और चांदनी का जन्म इसी क्षेत्र में हुआ है और वे यहीं स्थायी रूप से बस चुकी हैं।

संघर्षरहित सहअस्तित्व: इन बाघिनों ने अब तक किसी भी इंसान या पालतू पशु पर हमला नहीं किया है। इसलिए यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष का कोई प्रश्न नहीं है।

रोजगार का मुख्य साधन: इन बाघिनों के कारण स्थानीय गाइड, जिप्सी चालक और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े कई लोगों को रोजगार मिला है। १०४ परिवारों की रोजी-रोटी: इस क्षेत्र में कार्यरत करीब 104 गाइड और जिप्सी चालकों — यानी उनके परिवारों — की आजीविका इन दो बाघिनों पर निर्भर है।

गर्भवती बाघिनों की सुरक्षा: दोनों बाघिनों के गर्भवती होने के चलते स्थानांतरण से उनके और उनके शावकों के जीवन पर खतरा मंडरा सकता है पर्यटकों का समर्थन: ताडोबा आने वाले पर्यटक भी इन बाघिनों को यहीं बनाए रखने की मांग का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि ये ताडोबा का मुख्य आकर्षण हैं।

संवर्धन बनाम आजीविका — संतुलन ज़रूरी

स्थानीयों का कहना है कि, “अगर इन बाघिनों को यहां से हटाया गया, तो इससे ताडोबा के पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर गहरा असर पड़ेगा।”वहीं वन विभाग का तर्क है कि, सह्याद्री टाइगर रिज़र्व में जैव विविधता का संतुलन बनाए रखने और बाघों के पुनर्वास के लिए यह कदम आवश्यक है। अब स्थानीय विरोध और वन विभाग के निर्णय के बीच, यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘चंदा-चांदनी’ का भविष्य आखिर तय किस दिशा में होता है।