Nagpur: पेंच के जंगल से चोरबहुली तक पहुंचा बाघिन F2 का शावक, वन्यजीव कॉरिडोर कनेक्टिविटी की जगी उम्मीद
नागपुर: पेंच टाइगर रिजर्व के लिए एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। गोठानगांव की बाघिन F2 का आखिरी प्रसव का शावक 29 अक्टूबर 2026 को चोरबहुली गेट के पास दिखाई दिया। इस घटना को युवा बाघों के प्राकृतिक रूप से नए क्षेत्रों की ओर विचरण और संभावित वन्यजीव कॉरिडोर कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वन विभाग के अनुसार, यह युवा बाघ अपने लिए अनुकूल आवास और नए क्षेत्र की तलाश में विचरण कर रहा हो सकता है। इसके संभावित मूवमेंट रूट को लेकर कुही–भंडारा–रामटेक पाओनी–पाओनी बफर–राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44)–चोरबहुली मार्ग की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस कॉरिडोर की वास्तविक निरंतरता और उपयोगिता की पुष्टि के लिए अभी वैज्ञानिक अध्ययन और लगातार निगरानी की आवश्यकता है। चोरबहुली वन्यजीव परिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण कार्यों को भी इस घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्षेत्र में नियमित गश्त, वन्यजीव सुरक्षा, आवास सुधार, जल संरक्षण, वन बंधों का निर्माण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के माध्यम से जंगल को वन्यजीवों के अनुकूल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से वन क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए बेहतर परिस्थितियां तैयार करने में मदद मिल रही है। बाघ के इस क्षेत्र में दिखाई देने से वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन और प्राकृतिक आवास के संरक्षण का महत्व एक बार फिर सामने आया है।
पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक अक्षय गजभिये ने इस संबंध में कहा कि बाघिन F2 के आखिरी लिटर के शावक का चोरबहुली गेट के पास दिखाई देना उत्साहजनक संकेत है। इससे पता चलता है कि युवा बाघ इस विस्तृत वन परिदृश्य में नए क्षेत्रों की ओर विचरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "फिलहाल बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि बाघ ने इस क्षेत्र में अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है या वह केवल यहां से गुजर रहा है। हमारी प्राथमिकता इस क्षेत्र के आवास को सुरक्षित और अनुकूल बनाए रखना है, ताकि युवा बाघ अपने लिए उपयुक्त क्षेत्र तलाश सके और समय के साथ पेंच में बाघों की आबादी स्थिर हो सके।"
पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक अक्षय गजभिये ने कहा कि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए बेहतर आवास और आपस में जुड़े वन क्षेत्रों का होना बेहद जरूरी है। बाघिन F2 के शावक की यह मौजूदगी पेंच के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, संभावित कॉरिडोर की पुष्टि आने वाले समय में निगरानी और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर ही हो सकेगी।
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