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एकनाथ शिंदे का गुट, पार्टी नहीं; भाजपा में विलीन हो जाएं तो उनके लिए अच्छा’; संजय राऊत का तीखा हमला, नितेश राणे को बताया ‘हिंदुत्व का नया मुल्ला’


नागपुर: शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) (Shivsena Uddhav Thackeray Function) के सांसद संजय राऊत (Sanjay Raut) ने महाराष्ट्र (Maharashtra) के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना (Shivsena) के प्रमुख एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) पर तीखा हमला बोला है। राऊत ने तंज कसते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे को खुद को भाजपा (BJP) में विलीन कर लेना चाहिए, क्योंकि उनके दल के ‘कमांडर इन चीफ’ अमित शाह (Amit Shah) हैं। उन्होंने दावा किया कि एकनाथ शिंदे की अपनी कोई पार्टी नहीं, बल्कि केवल एक गुट है।

संजय राऊत ने कहा कि एकनाथ शिंदे को बार-बार कभी गोवा तो कभी दिल्ली जाना पड़ता है और अमित शाह के पीछे भागना पड़ता है। ऐसे में भाजपा में विलय उनके लिए ही बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिंदे गुट की विचारधारा एक हो सकती है, लेकिन बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना और ठाकरे गुट की विचारधारा में अंतर है।

मनोज जरांगे (Manoj Jarange) द्वारा एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) पर की गई टिप्पणी को लेकर भी संजय राऊत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे भरोसेमंद नहीं हैं। राऊत ने सवाल किया कि जब शिंदे बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नहीं हुए, तो वे मनोज जरांगे के कैसे हो सकते हैं?

नितेश राणे ‘हिंदुत्व का नया मुल्ला’
संजय राऊत ने मंत्री नितेश राणे (Nitesh Rane) के गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर दिए गए बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। राऊत ने नितेश राणे पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘हिंदुत्व का नया मुल्ला’ बताया। राऊत ने कहा कि, "नितेश राणे इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और जोर-जोर से अपनी बात कह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राणे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ‘हाफ चड्डीवाला’ कह चुके हैं और वीर सावरकर को ‘माफीवीर’ कहने वालों में भी उनका नाम रहा है। राऊत ने सवाल किया कि ऐसे में वे अब लोगों को हिंदुत्व का पाठ कैसे पढ़ा सकते हैं?

‘मंत्री हैं, मंत्रियों जैसी भाषा बोलें’
राऊत ने कहा कि नितेश राणे मंत्री हैं और उन्हें मंत्री पद की गरिमा के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जिससे दंगे भड़कने जैसी स्थिति पैदा हो।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नितेश राणे की हिंदुत्व संबंधी भूमिका को देश के शंकराचार्यों की मंजूरी है या नहीं। राऊत ने उन्हें नागपुर आकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से चर्चा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में हिंदुत्व को लेकर अलग बात कही थी, जबकि राणे की भाषा अलग है।

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर भी पलटवार
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर नितेश राणे द्वारा की गई आलोचना पर भी संजय राऊत ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की तुलना किससे की जा रही है? राऊत ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने कभी राहुल गांधी के जूते उठाए हैं, वही आज उनकी आलोचना कर रहे हैं।