वारकरी संप्रदाय विवाद: विकास लवांडे पर फेंकी गई स्याही, अमोल मिटकरी ने बताया 'वारकरी संस्कृति का अपमान'
अकोला: महाराष्ट्र की समृद्ध वारकरी परंपरा में कथित 'घुसपैठ' को लेकर शुरू हुआ विवाद अब हिंसक मोड़ ले चुका है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता विकास लवांडे पर कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा स्याही फेंकने की घटना सामने आई है। इस हमले के बाद राज्य के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तनाव चरम पर है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब विकास लवांडे ने वारकरी संप्रदाय में कथित तौर पर 20 बाहरी लोगों की 'घुसपैठ' की एक सूची सार्वजनिक की थी। इस सूची के सामने आने के बाद हिंदू जनजागृति समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए लवांडे की गिरफ्तारी की मांग की थी। समिति का तर्क है कि वारकरी संप्रदाय महाराष्ट्र की एक पवित्र परंपरा है और इस तरह के बयानों से लाखों भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
स्याही हमले के बाद गर्माया माहौल
आज हुई स्याही फेंकने की घटना ने इस विवाद की आग में घी डालने का काम किया है। जहाँ एक तरफ हिंदू जनजागृति समिति ने पहले ही चेतावनी दी थी कि कार्रवाई न होने पर वे सड़क पर उतरेंगे, वहीं दूसरी ओर इस हमले को राजनीतिक प्रतिशोध और असहिष्णुता से जोड़कर देखा जा रहा है।
अमोल मिटकरी का कड़ा प्रहार
राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक अमोल मिटकरी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने हमले की निंदा करते हुए कहा, "किसी व्यक्ति को अकेला पाकर उसे घेरना, उस पर स्याही फेंकना और जान से मारने की धमकी देना वारकरी संप्रदाय की संस्कृति नहीं हो सकती। यह कृत्य पूरी तरह से अनुचित है और हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।"
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