कभी केदार के इशारे पर झंडा उठाने वाले 'नेताजी'... आज वक्त का पहिया घूमा, सांसद बने तो कद्दावर पूर्व मंत्री को आधे घंटे तक करवाया इंतजार
नागपुर: सियासत की बिसात पर कब कौन सा पासा पलट जाए और समीकरण किस करवट बैठ जाएं, यह कह पाना हमेशा कठिन होता है। इन दिनों नागपुर के राजनीतिक पटल पर एक ऐसा ही दिलचस्प और चर्चा का केंद्र बना हुआ वाकया सामने आया है, जिसने सियासी हलकों में नई सुगबुगाहट पैदा कर दी है। कभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुनील केदार के राजनीतिक प्रभाव एवं मार्गदर्शन में अपनी यात्रा तय करने वाले रामटेक के मौजूदा सांसद श्यामकुमार बर्वे से जुड़ा यह प्रसंग शहरभर में कौतूहल का विषय बन गया है। जिस नेता को कभी सुनील केदार का प्रत्यक्ष सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त रहा, आज उसी दिग्गज पूर्व मंत्री को सांसद महोदय की प्रतीक्षा में प्रेस क्लब में लगभग आधे घंटे तक ताटकड़ बैठना पड़ा।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि भी कम रोचक नहीं है। कभी स्थानीय ग्राम पंचायत स्तर की राजनीति से अपने सफर का श्रीगणेश करने वाले श्यामकुमार बर्वे को मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय करने और रामटेक लोकसभा क्षेत्र तक का मार्ग प्रशस्त करने में सुनील केदार की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। परंतु राजनीति के गलियारों में यह सर्वविदित है कि जैसे-जैसे रुतबा और पद बदलते हैं, वैसे-वैसे कार्यशैली और तौर-तरीके भी बदल जाते हैं।
एसआईआर को आयोजित थी पत्रकारवार्ता
प्रसंग नागपुर प्रेस क्लब का है, जहाँ कांग्रेस पार्टी की ओर से मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) और उसमें कथित विसंगतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता (प्रेस कॉन्फ्रेंस) आहूत की गई थी। निर्धारित समय यानी दोपहर बारह बजे पूर्व मंत्री सुनील केदार और राजेंद्र मुळक तो पूर्ण समयबद्धता के साथ उपस्थित हो गए, किंतु इस पूरे आयोजन के मुख्य वक्ता एवं रामटेक के सांसद श्यामकुमार बर्वे समय पर नहीं पहुंच सके। सभागार में पहली पंक्ति में सांसद महोदय के लिए आरक्षित कुर्सी रिक्त पड़ी थी और समय निरंतर आगे बढ़ रहा था।
30 मिनट की देरी से पहुंचे सांसद महोदय
जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे खिसकती गईं, वैसे-वैसे नेताओं की प्रतीक्षा का दायरा भी बढ़ता गया। सुनील केदार जैसे मुखर और वरिष्ठ नेता को एक सामान्य प्रेस वार्ता के श्रीगणेश के लिए अपने ही राजनीतिक सफर से जुड़े रहे 'सांसद महोदय' की लगभग तीस मिनट तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। अंततः, दोपहर साढ़े बारह बजे जब सांसद महोदय का दीदार हुआ, तब जाकर आगे की औपचारिक कार्रवाई आरंभ हो पाई।
जिले में चर्चाओं का दौर हुआ शुरू
वर्तमान में नागपुर के राजनीतिक वृत्त और विचार-विमर्श के केंद्रों पर यही प्रसंग मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषक और आम जनमानस इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि कभी केदार साहब के एक इशारे पर तत्पर रहने वाले नेताजी आज जब सांसद के सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, तो कद्दावर नेताओं को भी उनके आगमन की लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। राजनीति के इन परिवर्तित और अनूठे समीकरणों ने फिलहाल नागपुर की आबोहवा में एक नया गर्माहट भरा आयाम जोड़ दिया है।
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