अकाल पर विजय वडेट्टीवार का महायुति सरकार पर हमला, बोले- ‘केंद्र की राह मत देखो, किसानों के लिए खोलो सरकारी खजाना’
नागपुर: महाराष्ट्र में गंभीर अकाल जैसी स्थिति के बीच कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने राज्य सरकार से किसानों के पक्ष में तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को अन्य सभी कामों को अलग रखते हुए किसानों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। केंद्र सरकार की मदद का इंतजार किए बिना राज्य सरकार को अपना खजाना खोलकर किसानों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता जमा करनी चाहिए।
वडेट्टीवार ने कहा कि, "अकाल प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को अपने जन्मदिन के भव्य आयोजन टालने चाहिए।" उन्होंने कहा कि, "बच्चों के जन्मदिन हर साल मनाए जा सकते हैं, लेकिन मौजूदा संकट में किसानों के दुख को देखते हुए सत्ताधारियों को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।" वडेट्टीवार ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि, "गुजरात को बड़े आर्थिक पैकेज दिए जाते हैं, जबकि महाराष्ट्र के हिस्से में अपेक्षाकृत कम सहायता आती है।"
तत्काल चारा छावनियां शुरू करने की मांग
वडेट्टीवार ने कहा कि, "किसानों के नुकसान का तत्काल पंचनामा पूरा किया जाना चाहिए।" उन्होंने सरकार से अकाल प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत चारा छावनियां शुरू करने और फलबागों को हुए नुकसान के लिए बड़ी आर्थिक सहायता घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि, "किसानों की आंखों के आंसू केवल मुख्यमंत्री के कंधे पर आकर न रुकें, बल्कि सरकार को उनके संकट को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।"
‘पिछले साल के 31 हजार करोड़ के पैकेज का क्या हुआ?’
वडेट्टीवार ने पिछले वर्ष घोषित राहत पैकेज को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि, "25 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने 31,600 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। उस समय राज्य के 29 जिले प्रभावित बताए गए थे।" वडेट्टीवार का दावा है कि, "अलग-अलग नियम लागू किए जाने के कारण वास्तविक रूप से करीब 15 हजार करोड़ रुपये ही वितरित किए गए, जो घोषित पैकेज का लगभग 49 प्रतिशत है। उन्होंने सवाल किया कि बाकी राशि का क्या हुआ।"
अकाल पर तीन दिवसीय विशेष अधिवेशन की मांग
कांग्रेस नेता ने राज्य में अकाल की स्थिति पर चर्चा के लिए तत्काल तीन दिवसीय विशेष विधानसभा अधिवेशन बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इतने बड़े संकट के समय सरकार को ‘एकला चलो रे’ की भूमिका नहीं अपनानी चाहिए। सरकार को विपक्ष को विश्वास में लेकर दुष्काल की स्थिति पर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए और किसानों के लिए ठोस राहत की घोषणा करनी चाहिए।
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