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Nagpur

Assembly Election 2024: रामटेक विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए बनी दूर की कौड़ी, तीन दशक से नहीं जीती सीट; जानें मौजूदा स्थिति


नागपुर: रामटेक दुनिया के सबसे पुराने जगहों में से एक है। सीता हरण के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम उनकी खोज में लंका की ओर जा रहे थे। अपनी इस यात्रा के दौरान श्री राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ वह विदर्भ पहुंचे। यानी तब के कौंडिण्यपुर के नाम से जाना जाता था। श्री राम ने यहाँ कई दिन बिताए। जिसके बाद वह क्षेत्र रामटेक के नाम से विख्यात हो गया। वर्तमान में यह रामटेक जितना अध्यात्म में महत्वपूर्ण है, उतना ही राजनीति में। रामटेक विधानसभा सीट नागपुर जिले की प्रमुख विधानसभा सीटों में आती है। 2019 के विधानसभा चुनाव में यहाँ निर्दलीय उम्मीदवार आशीष जायसवाल को जीत मिली थी। वहीं पांच साल के बाद फिर एक बार चुनाव होने वाले हैं। इस बार सीट का क्या है मिजाज, जनता मौजूदा विधायक को लेकर क्या सोचती है। इस बार फिर जायसवाल जीतेंगे या जनता करेगी बदलाव। तमाम सवालों का जवाब आकड़ो के माध्यम से। 

1962 में रामटेक विधानसभा सीट का गठन हुआ। यह एक सामान्य सीट है। सबसे महत्वपूर्ण की यह सीट देश की उन सीटों में शामिल है। जिस पर पिछले तीन दशकों से कांग्रेस का उम्मीदवार जीत नहीं पाया है। उससे भी महत्वपूर्ण की वह चुनावों में दूसरे नंबर पर भी नहीं रही। 2019 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना नेता रहे आशीष जायसवाल ने टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव में उतरे और जित हासिल की। जहां उन्होंने भाजपा उम्मीदवार मल्लिकार्जुन रेड्डी को करीब 24 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। जायसवाल को जहां 67,419 वोट मिले थे, वहीं रेड्डी को 43,006 वोटो से संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। 


रामटेक विधानसभा सीट की चुनावी इतिहास

1962 में पहली बार यहाँ विधानसभा चुनाव हुए। जहां कांग्रेस उम्मीदवार को जीत मिली थी। मोहम्मद अब्दुल्ला खान पठान विधानसभा के पहले विधायक बने। 1962 से 80 तक यहाँ कांग्रेस का उम्मीदवार जीतता रहा। 1985 के चुनाव में जनता पार्टी को यहाँ जीत मिली। इसके बाद 1990 में जनता दल यहाँ से चुनाव जीती। 1991 में कांग्रेस ने दोबारा यह सीट जीती। हालांकि, उसकी यह जीत आखिरी जीत रही। 1995 से लेकर 2019 तक यहां शिवसेना का उम्मीदवार चुनाव जीतते आ रहा है। 2014 में जब शिवसेना और भाजपा का गठबंधन टुटा तो पहली बार भाजपा यहाँ चुनाव जीती। हालांकि, 2019 में पार्टी को सीट अपने पास बरक़रार रखने में कामयाब नहीं हुई। अभी तक हुए 13 चुनाव में पांच बार शिवसेना जिसमें दो निर्दलीय भी शामिल है। एक-एक बार भाजपा, जनता दल और जनता पार्टी को जीत मिली है। वहीँ कांग्रेस छह बार जीती है।


विधानसभा क्षेत्र का जातीय समीकरण 

रामटेक विधानसभा एक सामान्य सीट है। क्षेत्र की 90 प्रतिशत जनसंख्या हिन्दू है। 2011 की जनगड़ना के अनुसार, रामटेक विधानसभा में 42,625 अनुसूचित जाती, 55,526 अनुसूचित जनजाति के मतदाता शामिल है। इसी के साथ 5,561 मुस्लिम मतदाता भी हैं। रामटेक विधानसभा में ग्रामीण मतदाताओं की संख्या लगभग 217,822 है, जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 78.34% है। शहरी मतदाताओं की संख्या लगभग 60,225 है, जो कुल जनसंख्या का 21.66 प्रतिशत है।


विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे 

रामटेक विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले लोगों की प्रमुख जीविका का स्त्रोत पर्यटन हैं। श्री राम गढ़ मंदिर, पेंच टाइगर रिजर्व जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्र इस विधानसभा क्षेत्र में आतें हैं। रोजाना हजारो की संख्या में पर्यटक यहाँ घूमने और दर्शन करने के लिए आतें हैं। वर्तमान में गढ़ मंदिर का विकास यहाँ का प्रमुख मुद्दा है। कई सालों से रामटेकवासी  मंदिर के पुनर्विकास के इंतजाम में बैठे हुए हैं। इसी के साथ रेलवे लाइन भी एक बड़ा मुद्दा है। नागपुर से रामटेक की दुरी करीब 65 किलोमीटर से ज्यादा है। वर्तमान में सड़क मार्ग ही जिला मुख्यालय जाने एक लिए एक मात्रा पर्याय है। हालांकि, रेलवे लाइन मौजूद है लेकिन उसमे ट्रेनों का संचालन बेहद कम है। नागरिक लगातार रामटेक से नागपुर के बीच सीधी मेमो चलने की मांग कर रहे हैं। रामटेक विधानसभा का क्षेत्र पेंच टाइगर रिजर्व में भी आता है। जिसके कारण मानव-वन्यजीव सघर्ष भी यहाँ एक मुद्दा है। हालांकि, यहाँ वैसा संघर्ष नहीं दिखाई देता जो ताडोबा-अंधारी में दिखाई देता है। 


मौजूदा विधायक की स्थिति 

रामटेक से आशीष जायसवाल विधायक है। भले वह निर्दलीय  चुनाव जीते हैं, लेकिन वह शिवसेना के नेता होने के कारण उन्हें शिवसेना विधायक के तौर पर जाना जाता है। विधानसभा में जायसवाल की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। जनता से उनका संपर्क और सीधा जुड़ाव उनका सबसे प्लस पॉइंट है। इसी के साथ विपक्षी नेताओं से उनका तालमेल भी उन्हें अन्य नेताओ से अलग बनाता है। हालांकि, उनके गठबंधन के साथी भाजपा के कार्यकर्ता लगातार किसी न किसी मुद्दे पर उनपर हमलावर दिखाई देते हैं। आज अगर फिर से विधानसभा चुनाव होते हैं तो जायसवाल के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होगी।